बदलते युग के साथ महिलाओं की स्टाइल और महिलाओं के पहनावे में बहुत तेजी से बदलाव आ रहा है । इस बदलते स्टाइल में सबसे ज्यादा असर महिलाओं की वेश भूषा में आ रहा है। एक वक़्त वो था जब महिलाएं अपना चेहरा भी घूघंट में छुपा के रखती थी , इस बदलाव में सबसे ज्यादा यौगदन फ़िल्म जगत का माना जाता है। जिस तेजी से आज की फिल्मो में नये नये स्टाइल्स के साथ अबिनेत्रियां आती है, उसको आज की आम महिलायें उसको अपनाने लगी हैं , पर सवाल ये भी है की क्या ये बदलता स्टाइल कही न कही महिलाओं के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है.…? क्या यह बदलता स्टाइल समाज की नज़रों में महिलाओं को एक अलग दर्जा दे रहा है.…? सवाल ये भी है की क्या इस बदलते स्टाइल ने महिलाओं की इज्जत कम कर दी है।
जिस तरह कल्चर बदल रहा है जिस तरह परिवेश बदल रहा है, लोगो की सोच भी बदल रही है , जहाँ पहले लोग महिलाओं को घर की लक्ष्मी समझते थे वाही आज का युवा वर्ग उसी घर की लक्ष्मी को सिर्फ एक इस्तमाल की चीज़ समझ बैठा है ।
जिस तरह कल्चर बदल रहा है जिस तरह परिवेश बदल रहा है, लोगो की सोच भी बदल रही है , जहाँ पहले लोग महिलाओं को घर की लक्ष्मी समझते थे वाही आज का युवा वर्ग उसी घर की लक्ष्मी को सिर्फ एक इस्तमाल की चीज़ समझ बैठा है ।
पर जिस तेजी से समाज में परिवर्तन आ रहा है उसे ये तो साफ़ है की आज की महिलाएं उस समाज के साथ कंधे से कन्धा मिला के चलना चाह रही है। जिसमे आज का बदलता आधुनिक फैसन उनकी खूबसूरती एवम् उनके विश्वास को भी बढ़ा रहा है , ऐसा कोई भी सेक्टर नहीं है जहाँ महिलाओं का पुरुष के बराबर यौगदन न हो। हर फील्ड में महिलाएं पुरषों की तुलना में आगे हैं पर क्यों ये समाज इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर रहा क्यों वो आज भी महिलाओं को अपना गुलाम रखना चाहता हैं।
इन सब का जवाब तो नहीं है बस उम्मीद हैं की आज का समाज पुरषों के साथ साथ महिलाओं को भी समझेगा और बदलते दौर में उनकी भी उतनी सहभागिता को अपनायेगा।

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